बहुत कुछ सीख़ा है मैंने अब तक़
हासिल किये कई ख़िताब मैंने,
पर अस्ल ज़िन्दगी में ख़ुद को आज़माने से
डरता हूँ मैं
खूब चोटें खायी उभरते उभरते
फ़र्क़ नहीं किया दुश्मनो दोस्तों ने
इसी लिए शायद अपनापन बढ़ाने से,
डरता हूँ मैं
बहुत अच्छी है दुनिया
ये कहते है लोग, जताते है लोग,
पर बीत चूका है इतना कुछ, अच्छाईसे इनकी,
डरता हूँ मैं
ज़िन्दगी है, जीना पड़ेगा,
हो कोई भी हश्र निभाना पड़ेगा
ये हौसला है, कुछ भी कर जाऊंगा मैं, फिर भी न जाने क्यूँ,
डरता हूँ मैं


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